ध्येय श्लोक और वाक्य
तत्कर्म यन्न बन्धाय सा
विद्या या विमुक्तये ।
आयासायाऽपरं कर्म
विद्यान्या शिल्पनैपुणम् ।।
- श्री विष्णुपुराण (१-१९-४१)
अर्थात्: कर्म वही है जो बंधन में ना बाँधे, विद्या वही है जो मुक्त करे। अन्य सभी कर्म व विद्याएँ मात्र श्रम और कौशल है।
राष्ट्रीय पुनरुत्थान के लिए संपूर्ण शिक्षा की नीति, पाठ्यक्रम तथा प्रविधि में भारतीयता को समाहित करने हेतु अनुसंधान, प्रबोधन, प्रशिक्षण, प्रकाशन और संगठन करना भारतीय शिक्षण मंडल का ध्येय है।
प्रार्थना
जीवने यावदादानं स्यात्प्रदानं ततोऽधिकम्।
इत्येषा प्रार्थनास्माकं भगवन्परिपूर्यताम्॥
भावार्थ: हे भगवन! हमारी यह प्रार्थना पूर्ण करें कि जीवन में हमें समाज, राष्ट्र और प्रकृति से जितना कुछ प्राप्त हुआ है, हम उसके प्रति कृतज्ञ भाव रखते हुए उससे भी अधिक लौटाने और लोककल्याण में अपना योगदान देने का सतत प्रयास करें।
कल्याण मंत्र
सर्वे भवन्तु सुखिनः सर्वे सन्तु निरामया:।
सर्वे भद्राणि पश्यन्तु मा कश्चित्दुःखभाग्भवेत्।।
ॐ शांति: शांति: शांति: ।।
भावार्थ: सभी प्राणी सुखी और प्रसन्न रहें। सभी रोगमुक्त (निरोगी) रहें। सभी का मंगल हो और सभी कल्याणकारी घटनाओं के साक्षी बने । किसी भी व्यक्ति को कभी भी किसी प्रकार के दुःख का भागी न होना पड़े। सभी को भौतिक और आध्यात्मिक — तीनों प्रकार की तापों (कष्टों) से शांति प्राप्त हो।