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बी.एस.एम. भारत

शिक्षण मंडल
हमारा विचार | भाग १

भारतीयता की संकल्पना

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शिक्षा के भारतीय प्रतिमान का विकास करने के लिये भारतीयता की संकल्पना को स्पष्ट समझना होगा। फिर उन सिद्धांतों को शिक्षा क्षेत्र में कैसे लागू करेंगे, इस पर विचार हो सकेगा। जब हम भारतीयता की बात करते हैं तब हम उन सनातन सिद्धान्तों की बात कर रहे होते हैं जिनका विकास वैज्ञानिक आधार पर हमारे ऋषियों ने किया और समय-समय पर युग की आवश्यकताओं और चुनौतियों के अनुरूप ढालकर जीवन में उतारा। वर्तमान समय में आज की आवश्यकता के अनुसार इसी कार्य को पुनः करना आवश्यक है। इन सिद्धांतों को हम भारतीय इसलिए कह रहे हैं क्योंकि इनकी समझ व प्रयोग इस भूमि में अनादिकाल से हुआ है।

परिणाम व प्रभाव की दृष्टि से तो ये सार्वभौम हैं। पूरे विश्व में हर युग में ये सिद्धांत लागू हो सकते हैं। इसी कारण हमने इसे सनातन अर्थात किसी भी काल में किसी भी स्थान पर लागू होने वाला, यह संज्ञा दी। आज के संदर्भ में वर्तमान युगानुरूप व्यवस्था का निर्माण करने के लिये आइए, प्रथम इन मूल शाश्वत सिद्धांतों को सूचीबद्ध करने का प्रयत्न करते हैं।

01

एकात्मदृष्टि

वर्तमान में सारे जगत में पश्चिम की दृष्टि ही प्रभावी होने के कारण अखण्ड एकत्व के स्थान पर खण्ड-खण्ड विचार ही पूरी ज्ञान-परम्परा का आधार ब...

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02

विविधता का सम्मान

एकत्वदृष्टि का ही परिणाम है कि भारत में विविधता का सम्मान होता है। भारत में हम इस वैज्ञानिक तथ्य को जानते हैं कि वह एक तत्व जब प्रकट होता...

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03

दिव्यत्व प्रगटन ही जीवनध्येय

प्रत्येक जीव में पूर्णता पूर्व से ही विद्यमान है। यह सुप्त दिव्यत्व स्वयं को अभिव्यक्त करने के लिये प्रयासरत है। जीवन का ध्येय इसे पूर्णत...

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04

ईश्वरनिष्ठा

भारत का स्वभाव ही अध्यात्म है। इसके परिणामस्वरूप जीवन के सभी अंगों में ईश्वरनिष्ठा प्रकट होती है। चाहे नृत्य, गायन आदि कलाएँ हों अथवा चर्...

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05

समुत्कर्ष-धर्माधारित विकास

जैविक सृष्टि के प्रति आत्मीय संवेदना का परिणाम यह हुआ कि भारत ने समग्र एवं शाश्वत विकास के अद्वितीय प्रतिमान का अनुपालन सदियों से किया। अ...

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06

सामूहिक चरित्र (राष्ट्रीयता)

भारतीय संस्कृति सामूहिक है। हमारी सारी वैदिक प्रार्थनाएँ बहुवचन में हैं। स्वामी विवेकानन्द ने तो यहाँ तक कह दिया कि व्यक्तिगत मुक्ति सम्भ...

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07

पारिवारिक मूल्य

भारत सम्बन्धों की संस्कृति है। हम अजनबी को भी सम्बन्धसूचक संबोधन से सम्बोधित करते हैं। सड़क पर चलते अनजान व्यक्ति को भी हम भाईसाहब, बहनजी...

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08

दायित्वबोध (यज्ञकर्म)

यज्ञ भारतीय संस्कृति की अद्वितीय संकल्पना है। प्रत्येक कार्य यदि यज्ञ में आहुति के रूप में किया जाए तो कर्म में उदात्त दायित्वबोध जगता है...

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09

शास्त्रीय जीवनदृष्टि

भारतीय जीवनदृष्टि पूर्णतः शास्त्रीय है। अंग्रेज़ी शब्द Science का सही पर्याय शास्त्र है। शास्त्र केवल बाहरी पदार्थ के स्तर का कार्य-कारण ...

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