भारतीय शिक्षा दर्शन
उद्देश्य
स्वस्थ व्यक्ति निर्माण → स्वस्थ कुटुंब निर्माण → स्वस्थ समाज निर्माण → स्वस्थ राष्ट्र निर्माण
स्वस्थ अर्थात निर्भय व्यक्तियों का निर्माण ही शिक्षा का उद्देश्य है।
प्रत्येक व्यक्ति को अपनी असीम क्षमताओं का आभास कराते हुए, अपनी अद्वितीयता को प्रकट करने के लिए उद्यत करना ही शिक्षा का उद्देश्य है।
शिक्षा अधिगम के लक्षण-सूत्र:
नीति
विद्यार्थी केन्द्रित और शिक्षक आधारित
भारतीय ज्ञान संपदा से ओत-प्रोत – आधुनिक तंत्र ज्ञान से युक्त – भारतीय भाषाओं की प्रधानता
गुरुकुल शिक्षा प्रविधि से प्रेरित व आधुनिक कौशल समावेशी
मुक्त करी - युक्त करी - अर्थ करी
पाठ्यक्रम
व्यक्ति के समग्र विकास हेतु ऐसा अधिगम सुनिश्चित करना, जो कि सरल से जटिल, ज्ञात से अज्ञात, और स्थानीय से वैश्विक (ब्रह्मांडीय) संदर्भों की ओर क्रमशः अग्रसर करते हुए अंतर्निहित ज्ञान को मन, वचन, तथा कर्म के द्वारा प्रकट करने में सहायक हो।
प्रविधि
सिखाने के स्थान पर स्वयं सीखने के लिए प्रेरित करना, जिसमें शिक्षक की भूमिका एक मार्गदर्शक एवं उत्प्रेरक की होनी चाहिए।
संदर्भ
• तैत्तिरीय उपनिषद्, ब्रह्मानंदवल्ली
• महर्षि अरविंद का शिक्षा दर्शन
• धर्मपाल शिक्षा चिंतन