विकास एवं उपलब्धियाँ
रामनवमी के पावन अवसर (युगाब्द 5071, 27 मार्च 1969) पर मुंबई में संगठन की स्थापना।
19 अप्रैल को बी.एस.एम. को मुंबई चैरिटी कमिश्नर से पंजीकरण संख्या F-1738 प्राप्त हुई।
प्रथम राष्ट्रीय अधिवेशन में राष्ट्रीय शिक्षा नीति के प्रारूपण का कार्य प्रारंभ।
राष्ट्रीय शिक्षा नीति पर प्रथम राष्ट्रीय सम्मेलन दिल्ली में आयोजित।
5 मई को बी.एस.एम. के प्रतिनिधिमंडल द्वारा शिक्षा नीति से संबंधित प्रारूप संसद के समक्ष प्रस्तुत।
शिक्षण मंडल से अखिल भारतीय राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ (ABRSM) का उदय।
शालेय प्रकल्प और महिला प्रकोष्ठ के नाम से नई गतिविधियों का शुभारंभ।
प्रथम राष्ट्रीय अधिवेशन कानपुर में संपन्न।
द्वितीय राष्ट्रीय अधिवेशन विशाखापट्टनम में आयोजित।
वार्षिक पत्रिका 'दर्शन' का विमोचन।
तृतीय राष्ट्रीय अधिवेशन नागपुर में आयोजित।
तत्कालीन शिक्षा मंत्री श्रीमती स्मृति ईरानी द्वारा ग्वालियर में चतुर्थ राष्ट्रीय अधिवेशन का उद्घाटन। राष्ट्रीय शिक्षा नीति के प्रारूप पर गहन मंथन।
नागपुर में RFRF की स्थापना।
तत्कालीन राष्ट्रपति श्री प्रणब मुखर्जी द्वारा नई दिल्ली में 'भारत बोध' पर अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन का उद्घाटन।
विस्तारक योजना का शुभारंभ।
28 से 30 अप्रैल तक उज्जैन में अंतरराष्ट्रीय विराट गुरुकुल सम्मेलन।
29 सितंबर को आदरणीय प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी द्वारा अकादमिक नेतृत्व के प्रथम सम्मेलन (CAL1) का उद्घाटन।
नवंबर में फरीदाबाद में पंचम राष्ट्रीय अधिवेशन।
फरवरी में तत्कालीन उपराष्ट्रपति श्री वेंकैया नायडू जी द्वारा हैदराबाद में 'डेवलपमेंट डिस्कोर्स' पर अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन का उद्घाटन।
27 जुलाई को AICTE, UGC, IGNOU के सहयोग से राष्ट्रीय शिक्षा नीति पर द्वितीय सम्मेलन (CAL2)। तत्कालीन शिक्षा मंत्री डॉ. रमेश पोखरियाल निशंक मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे।
ध्येय वाक्य का अंगीकरण।
काशी प्रांत में 'संयोगी शिविर' का प्रारंभ।
21 जनवरी को नीति आयोग के उपाध्यक्ष डॉ. राजीव कुमार द्वारा तृतीय सम्मेलन (CAL3) का उद्घाटन। इसके पश्चात राष्ट्रव्यापी 586 आनंदशालाओं का संचालन।
23-24 अप्रैल को नागपुर में माननीय मंत्री श्री नितिन गडकरी जी द्वारा चतुर्थ सम्मेलन (CAL4) का उद्घाटन।
अगस्त में भीमताल, उत्तराखंड में द्वितीय संयोगी शिविर का आयोजन।
11 नवंबर को माननीय रक्षा मंत्री श्री राजनाथ सिंह द्वारा तीन दिवसीय अखिल भारतीय युवा शोधकर्ता सम्मेलन का उद्घाटन।
जून में वैशाली, उत्तर बिहार प्रांत में प्रांतीय स्तर का संयोगी शिविर आयोजित।
दिल्ली प्रांत ने 'आत्मवत् सर्वभूतेषु' के ध्येय वाक्य के साथ 21-दिवसीय अनुभूति शिविर प्रारंभ किया, इसे एक निरंतर परंपरा के रूप में स्थापित किया।
सितंबर में निजी विश्वविद्यालय नियमन नीति पर भोपाल में राष्ट्रीय आनंदशाला का आयोजन।
दिसंबर में जयपुर में तीन दिवसीय प्रथम अखिल भारतीय अधिकारी अभ्यास वर्ग का आयोजन।
फरवरी में दिल्ली प्रांत के शैक्षिक प्रकोष्ठ और विज्ञान भारती के सहयोग से कक्षा 9वीं-12वीं में ड्रोन तकनीक के समावेश हेतु विस्तृत पाठ्यक्रम विकसित किया गया।
मार्च में भारतीय भाषा सम्मेलनों का औपचारिक शुभारंभ।
मई में रामटेक, महाराष्ट्र में विदर्भ प्रांत द्वारा अनुभूति शिविर का आयोजन।
उत्तराखण्ड के देवप्रयाग के केन्द्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय के स्थानीय परिसर में दिल्ली प्रान्त का अनुभूति शिविर - २ संपन्न। कुल संख्या ६७ रही।
जून में मंडल कार्य-विभाग, भारतीय ज्ञान संपदा गतिविधि, शिक्षक-शिक्षा गतिविधि, उच्च शिक्षा गतिविधि और शिक्षा एवं तंत्रज्ञान गतिविधि का औपचारिक शुभारंभ।
नवंबर में विविभा-2024 के उद्घाटन के दौरान शोध पत्रिका 'प्रज्ञानम्' के प्रथम अंक का विमोचन।
15 नवंबर को विजन फॉर विकसित भारत (विविभा-2024), तीन दिवसीय राष्ट्रीय शोधकर्ता सम्मेलन का उद्घाटन परम पूजनीय सरसंघचालक डॉ. मोहन जी भागवत द्वारा संपन्न, जिसमें 1400 शोधार्थियों ने भाग लिया।
7 फरवरी को बी.एस.एम. के एक प्रतिनिधिमंडल द्वारा यूजीसी के अध्यक्ष को 2025 के नए यूजीसी विनियम प्रारूप के संबंध में सिफारिशें सौंपी गईं।
मार्च से एआईसीटीई के सहयोग से 75,000+ प्रतिष्ठित उद्योगों और अनुसंधान संस्थानों में 1200+ विविभा शोधार्थियों को इंटर्नशिप के अवसर प्रदान किए गए।
जून में भारतीय भाषा गतिविधि का औपचारिक शुभारंभ।
जुलाई में: उत्तराखण्ड के भीमताल स्थित ग्राफिक एरा हिल विश्वविद्यालय में पहली अखिल भारतीय अनुभूति शिविर - ३ संपन्न हुआ। स्नातक, परास्नातक और शोध छात्रों की संख्या १३६ थी।
नवंबर में: पहली सात दिवसीय आवासीय शिक्षक आनंदशाला हरियाणा में स्थित चौधरी देवीलाल विश्वविद्यालय में प्रारंभ हुई, जिसमें १३ विश्वविद्यालयों के ५६ शिक्षकों ने भाग लिया।
२८, २९ नवंबर को: चार स्तरीय अभ्यास वर्गों में से प्रथम स्तर का २४ घंटे का अभ्यास वर्ग (परिचायक वर्ग), दिल्ली साऊथ एशियन विश्वविद्यालय (SAU) में प्रारंभ हुआ।
जून में: अनुभूति शिविर-४, पुणे स्थित रानीलक्ष्मीबाई महिला सैनिक शाला में संपन्न हुआ। कुल संख्या १११ रही।